भारतीय सैन्य अकादमी में श्रीलका सेना प्रमुख की ऐतिहासिक वापसी


प्रस्तावना: भावनाओं से भरा एक ऐतिहासिक दृश्य

देहरादून की हरी-भरी वादियों में स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) का परेड ग्राउंड 15 जून 2025 की सुबह एक असाधारण दृश्य का साक्षी बना। श्रीलंका के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीकेजीएम लसंथा रोड्रिगो, जिन्होंने स्वयं इसी संस्थान से कमीशन प्राप्त किया था, अब उसी परेड की समीक्षा करने वाले पहले विदेशी छात्र और पहले श्रीलंकाई सेना प्रमुख बन गए हैं।

उनकी आँखों में चमक, गर्व और भावुकता स्पष्ट थी। उन्होंने कहा – “यह अनुभव मेरे लिए बेहद सम्मानजनक है… मेरी आँखों में आँसू ला देने वाला क्षण है।”


🌍 द्विपक्षीय संबंधों की नई ऊँचाइयाँ

लेफ्टिनेंट जनरल रोड्रिगो की यह यात्रा केवल एक सैन्य परेड की समीक्षा भर नहीं थी, बल्कि यह भारत-श्रीलंका के दशकों पुराने रक्षा सहयोग में नई ऊर्जा और गहराई जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।

👉 11 से 14 जून 2025 के बीच हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य था:

  • सैन्य प्रशिक्षण और क्षमताओं के क्षेत्र में सहयोग को गहन करना।
  • दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों और सद्भाव को बढ़ावा देना।
  • साझा क्षेत्रीय चुनौतियों का एकीकृत और रणनीतिक उत्तर विकसित करना।

🎖️ IMA और लेफ्टिनेंट जनरल रोड्रिगो का गहरा नाता

लेफ्टिनेंट जनरल रोड्रिगो दिसंबर 1990 में IMA के 87वें कोर्स से कमीशन हुए थे। उनका सैन्य जीवन भारत और श्रीलंका की सैन्य शिक्षाओं का मिश्रण रहा है। उन्होंने:

  • श्रीलंका सैन्य अकादमी और IMA दोनों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • भारत में आर्टिलरी यंग ऑफिसर्स कोर्स में भाग लिया।
  • श्रीलंका की 18 फील्ड रेजिमेंट आर्टिलरी की कमान संभाली।
  • अमेरिका की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और पाकिस्तान के एक अल्पकालिक सैन्य पाठ्यक्रम से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

👉 इस विविध प्रशिक्षण ने उन्हें एक बहुआयामी, रणनीतिक सोच वाले सैन्य नेता में परिवर्तित किया, जो वर्तमान समय के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को बेहतर ढंग से समझते हैं।


🎓 IMA की 156वीं पासिंग आउट परेड: एक नजर में

🔸 कैडेटों की संख्या:
IMA की 156वीं पासिंग आउट परेड में कुल 451 जेंटलमैन कैडेट्स ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे:

  • 156 रेगुलर कोर्स
  • 45 टेक्निकल एंट्री स्कीम
  • 139 टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स

🔸 अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति:
इनमें से 32 कैडेट मित्र देशों से थे, जिसमें 2 श्रीलंकाई कैडेट भी शामिल थे।

🔸 महत्वपूर्ण व्यक्ति:
ब्रिगेडियर आरएमएस राथनायके जैसे वरिष्ठ श्रीलंकाई अधिकारी भी उपस्थित थे, जिनका पुत्र भी इस बार IMA से पास आउट हुआ।


🏅 सम्मान और पुरस्कार: भविष्य के लीडर्स को सलामी

इस परेड में सैन्य परंपराओं के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को विशेष सम्मान दिए गए:

पुरस्कारप्राप्तकर्ताविवरण
🗡️ स्वॉर्ड ऑफ ऑनरअन्नी नेहरासमग्र सर्वश्रेष्ठ कैडेट
🥇 गोल्ड मेडलरोनित रंजन नायकमेरिट क्रम में प्रथम स्थान
🥈 सिल्वर मेडलआकाश भदौरियातकनीकी स्नातकों में प्रथम स्थान
🥉 ब्रॉन्ज मेडलअनुराग वर्माबटालियन अंडर ऑफिसर
🌍 विदेशी कैडेट सम्माननिशान बालमी (नेपाल)विदेशी कैडेटों में सर्वश्रेष्ठ

👨‍✈️ लेफ्टिनेंट जनरल रोड्रिगो का प्रेरणादायक संदेश

कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:

“आप केवल एक रैंक नहीं पहनते हैं, बल्कि तीन अटूट जिम्मेदारियों का भार भी उठाते हैं – राष्ट्र के प्रति, अपने सैनिकों के प्रति और शहीदों के परिवारों के प्रति।”

उन्होंने विशेष रूप से विदेशी कैडेटों को IMA के “मूल्य ब्रांड एंबेसडर” कहा, जो इन मूल्यों को सीमाओं से परे ले जाकर अपने देशों में फैलाएंगे।


🤝 भारत-श्रीलंका रक्षा संबंध: एक साझा विरासत

भारत और श्रीलंका के रक्षा संबंध केवल सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। इस यात्रा ने स्पष्ट कर दिया कि:

  • भारत क्षेत्रीय स्थिरता में विश्वास करता है, और
  • श्रीलंका इस साझेदारी को सशक्त बनाना चाहता है।

यह यात्रा इस बात का प्रतीक बन गई है कि दो पड़ोसी राष्ट्र कैसे सैन्य सहयोग को “जन कूटनीति” के माध्यम से विस्तार दे सकते हैं।


📰 विश्वसनीय स्रोत: ‘द ट्रिब्यून’

इस महत्वपूर्ण घटना की जानकारी हमें भारत के एक प्रमुख समाचार पत्र ‘The Tribune’ से प्राप्त हुई, जो:

  • 1881 से प्रकाशित हो रहा है।
  • पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता के लिए जाना जाता है।
  • उत्तरी भारत का सबसे अधिक बिकने वाला अंग्रेज़ी दैनिक है।

🧠 अंतिम विचार: यह केवल एक परेड नहीं थी, यह इतिहास बन गया

इस परेड की सबसे खास बात यह नहीं थी कि यह IMA की 156वीं परेड थी, या कि इसमें कितने कैडेट पास आउट हुए। इसकी असली खासियत यह थी कि एक पूर्व कैडेट, आज उस परेड की समीक्षा कर रहा था, जिसने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत उसी परेड ग्राउंड पर की थी।

यह एक पूर्ण चक्र (Full Circle) जैसा था – एक प्रेरक उदाहरण हर युवा सैन्य अधिकारी के लिए कि संघर्ष, समर्पण और सेवा के साथ क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।


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