📢 बड़ी खबर!
राजस्थान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चल रही 2855 संविदा पदों की भर्ती रद्द कर दी गई है। यह फैसला राज्य सरकार द्वारा गंभीर अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को देखते हुए लिया गया है।
इस ब्लॉग में हम आपको विस्तार से बताएंगे:
➡️ कौन-कौन सी भर्तियाँ रद्द हुई हैं
➡️ क्या वजह रही इस फैसले की
➡️ किन जिलों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियाँ पाई गईं
➡️ पहले से नियुक्त लोगों का क्या होगा
➡️ और आगे की संभावनाएँ क्या हैं
📝 रद्द की गई भर्ती का विवरण
यह भर्ती 214.225 संख्या की अधिसूचना के तहत की जा रही थी और इसमें 2855 संविदा पद शामिल थे। यह भर्ती Urgent Temporary Based (UTB) के आधार पर की जा रही थी, जो कि Rajasthan Contractual Hiring Civil Post Rule 2022 के अंतर्गत आती है।
➤ कुल पद – 2855
इन पदों में शामिल हैं:
- 👩⚕️ महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Female Health Worker) – 169 पद
- 👨⚕️ एलोपैथिक मेडिकल ऑफिसर (Allopathic Medical Officer) – 162 पद
वेतन: ₹28,500 प्रति माह - 🧑⚕️ नर्स (Nurse) – 1941 पद
वेतन: ₹18,900 प्रति माह - 🧪 मेडिकल लैब टेक्नीशियन
- 👁️ ऑप्टोमेट्रिस्ट
- 👵 केयर असिस्टेंट
- 💊 फार्मा असिस्टेंट
ये सभी पद राजस्थान के विभिन्न जिलों में निकाले गए थे।
❌ क्यों हुई भर्ती रद्द? – जानिए मुख्य कारण
भर्ती को रद्द करने के पीछे कई गंभीर कारण सामने आए हैं:
🕵️♀️ 1. कोई मेरिट लिस्ट नहीं बनी
भर्ती में पारदर्शिता की कमी थी। कोई मेरिट लिस्ट तैयार नहीं की गई, जिससे चयन प्रक्रिया संदिग्ध हो गई।
📋 2. कोई इंटरव्यू नहीं हुआ
बिना किसी इंटरव्यू के लोगों को नियुक्त किया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि चयन प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ थीं।
🏢 3. निजी प्लेसमेंट एजेंसी को दे दिया गया काम
पूरी भर्ती प्रक्रिया को एक निजी एजेंसी के हवाले कर दिया गया था, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
💼 4. बिना आधार के नियुक्तियाँ
किस आधार पर किसे नियुक्त किया गया – इसकी कोई जानकारी या प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी।
🔍 भीलवाड़ा बना सबसे बड़ा कारण
भीलवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा गड़बड़ियाँ पाई गईं।
- CMHO डॉ. सी.पी. गोस्वामी ने भर्ती प्रक्रिया को अपने हाथ में ले लिया।
- उन्होंने CMHO कार्यालय में सीधे आवेदन लेना शुरू कर दिया, जो पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है।
- इस मनमानी के कारण पूरे प्रदेश की भर्ती की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
👩⚖️ सरकार का निर्णय
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव – गायत्री गाँड (Gayatri Gad) ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया।
- उन्होंने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए राज्य के सभी जिलों को आदेश जारी किया।
- उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा की अनियमितताओं ने पूरे विभाग की छवि खराब की है।
- उन्होंने निर्देश दिया कि यह भर्ती राज्यभर में उसी समय से रद्द मानी जाए और आगे कोई भी नियुक्ति न की जाए।
📅 लिखित आदेश – सोमवार को जारी होंगे
गायत्री गाँड ने स्पष्ट किया कि रद्द करने के लिखित आदेश सोमवार को जारी होंगे।
शनिवार को आदेश मौखिक और प्रशासनिक स्तर पर दिया गया था।
🤔 पहले से नियुक्त लोगों का क्या होगा?
जो लोग पहले से इस भर्ती के तहत नियुक्त हो चुके हैं, उनके लिए सरकार ने कहा है:
“उनके वेतन और कार्य का अलग से निर्देश जारी किया जाएगा।”
यानी हो सकता है कि उनकी नियुक्ति को भी समाप्त किया जाए या फिर उनका कार्य कुछ समय के लिए मान्य माना जाए – यह निर्णय अलग से लिया जाएगा।
📌 ध्यान दें – अन्य भर्ती पर कोई असर नहीं
जो परीक्षाएँ अगले महीने (जून) में होने वाली हैं, उनकी भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह रद्दीकरण सिर्फ 2855 संविदा पदों की भर्ती पर लागू है।
🗣️ आम जनता की प्रतिक्रिया
इस खबर के सामने आते ही राज्यभर के युवाओं और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों में नाराजगी और निराशा का माहौल है।
कई युवाओं का कहना है कि बिना सटीक प्रक्रिया के भर्ती करना और फिर उसे रद्द करना, उनके समय और मेहनत का अपमान है।
📚 निष्कर्ष – आगे क्या?
राज्य सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना ज़रूरी है।
इस घटना से ये साफ हो गया है कि:
- सिर्फ भर्ती निकलना ही नहीं, उसकी प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए
- युवाओं का विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है
- ऐसी घटनाएँ भविष्य में न हों, इसके लिए कड़े नियम और निगरानी ज़रूरी है
👉 आपको क्या लगता है?
क्या सरकार का यह फैसला सही था? क्या भर्ती में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए?
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